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रियल एस्टेट में जल संरक्षण पर जोर नारेडको माही कन्वेंशन 2026 में संयुक्त सचिव नितिन खाडे का आह्वान कहा आत्मनिर्भर और पर्यावरण अनुकूल बनें नए शहर

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Posted On:Monday, June 22, 2026

देश में गहराते जल संकट और तेजी से बदलती जलवायु परिस्थितियों के बीच रियल एस्टेट सेक्टर को पर्यावरण के प्रति अधिक जवाबदेह होने की जरूरत है। दिल्ली के 'यशोभूमि' में आयोजित पांचवें 'नारेडको माही रियल एस्टेट कन्वेंशन 2026' में यह महत्वपूर्ण संदेश दिया गया। कार्यक्रम के दौरान "टिकाऊ सामाजिक विकास और आत्मनिर्भर शहरों के लिए वैश्विक रास्ते" विषय पर आयोजित विशेष पैनल चर्चा को संबोधित करते हुए ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग के संयुक्त सचिव नितिन खाडे ने डेवलपर्स से अपनी आवासीय और वाणिज्यिक परियोजनाओं में जल संरक्षण तकनीकों को प्राथमिकता से लागू करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पानी की कमी एक बड़ी वैश्विक चिंता है, जिससे निपटने के लिए निर्माण क्षेत्र में नए और टिकाऊ मॉडल्स को अपनाना अब अनिवार्य हो चुका है।

संयुक्त सचिव नितिन खाडे ने विभाग की बड़ी जमीनी उपलब्धियों को साझा करते हुए बताया कि पिछले 12 वर्षों के दौरान सरकार ने देश की लगभग 3.4 करोड़ हेक्टेयर बंजर और क्षरित भूमि का सफल पुनरुद्धार (Restoration) किया है। इस पर्यावरण-अनुकूल प्रयास से न केवल कृषि उत्पादकता में सुधार हुआ है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका के नए अवसर भी पैदा हुए हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भविष्य के शहरीकरण को इस तरह डिजाइन किया जाना चाहिए जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिले। शहरों को अधिक रहने योग्य बनाने के लिए पारंपरिक तरीकों की जगह नवाचार और आधुनिक दृष्टिकोण को अपनाना समय की मांग है।

इस सम्मेलन में मौजूद आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के पूर्व सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने टिकाऊ शहरों की अवधारणा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भविष्य के शहर तभी फल-फूल सकते हैं जब वे पानी, स्वच्छ ऊर्जा और मानव संसाधनों के मामले में पूरी तरह आत्मनिर्भर और समावेशी होंगे। वहीं, नारेडको माही की अध्यक्ष अनंता एस. रघुवंशी ने देश में हो रहे तीव्र शहरीकरण के बीच पुरानी पड़ चुकी अवसंरचना के पुनर्विकास (Redevelopment) की व्यावहारिक चुनौतियों और जटिलताओं को रेखांकित किया।


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