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भारतीय इकोनॉमी के लिए कितना जरूरी है गोल्ड, भारत इतना करता है इंपोर्ट

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Posted On:Monday, May 11, 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए नागरिकों से एक साल तक सोना (Gold) न खरीदने की विशेष अपील की है। इस आह्वान के पीछे मुख्य उद्देश्य भारत के बढ़ते आयात बिल (Import Bill) को कम करना और देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ रहे दबाव को नियंत्रित करना है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्वर्ण उपभोक्ता है, जो अपनी जरूरतों का लगभग 90% हिस्सा विदेशों से आयात करता है। आंकड़ों के अनुसार, भारत हर साल 700 से 900 टन सोना खरीदता है, जिसके लिए करीब $50 बिलियन से $60 बिलियन की विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है।

सोने का आयात सीधे तौर पर औद्योगिक उत्पादन में योगदान नहीं देता, लेकिन यह भारत के चालू खाता घाटे (Current Account Deficit) को बढ़ाने वाला दूसरा सबसे बड़ा कारक है। विशेषकर मौजूदा समय में, जब पश्चिम एशिया में संघर्ष के चलते कच्चे तेल की कीमतें 105 डॉलर के पार पहुंच गई हैं, सरकार गैर-जरूरी आयात को कम करने पर ध्यान दे रही है। भारत के कुल आयात बिल में सोने की हिस्सेदारी लगभग 9% है।

दिलचस्प बात यह है कि प्रधानमंत्री की यह अपील एक ऐसे समय में आई है जब 2026 की शुरुआत से ही सोने के आयात में भारी गिरावट देखी जा रही है। जनवरी 2026 में 100 टन रहने वाला आयात मार्च तक गिरकर महज 20-22 टन पर सिमट गया। हालांकि, इस कमी के पीछे सिर्फ मांग में गिरावट नहीं, बल्कि GST और सीमा शुल्क (Customs) से जुड़ी प्रशासनिक और तकनीकी दिक्कतें भी शामिल हैं। अगर जनता इस अपील का समर्थन करती है, तो इससे न केवल भारतीय रुपया मजबूत होगा, बल्कि संकट के समय में अर्थव्यवस्था को एक नई स्थिरता भी मिलेगी।


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