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निर्यात वाले पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन पर उत्पाद शुल्क बढ़ा, नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू

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Posted On:Tuesday, August 4, 2026

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निर्यात किए जाने वाले पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन (एटीएफ) पर उत्पाद शुल्क में बढ़ोतरी की है। वित्त मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं। सरकार का कहना है कि यह फैसला वैश्विक ऊर्जा बाजार में कीमतों के उतार-चढ़ाव और घरेलू ईंधन आपूर्ति के संतुलन को बनाए रखने की नीति के तहत लिया गया है।

नई व्यवस्था के तहत निर्यात होने वाले पेट्रोल पर उत्पाद शुल्क में प्रति लीटर एक रुपये की वृद्धि की गई है। वहीं, डीजल पर शुल्क में उल्लेखनीय बढ़ोतरी करते हुए प्रति लीटर 10 रुपये की वृद्धि की गई है। इसके अलावा निर्यात किए जाने वाले विमान ईंधन पर भी प्रति लीटर 7.50 रुपये का अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लागू किया गया है।

ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल और ईंधन की कीमतों के आधार पर इन शुल्कों में बदलाव करती है। जब वैश्विक बाजार में ईंधन की कीमतें अधिक होती हैं, तब निर्यातकों को अतिरिक्त लाभ मिलने की संभावना रहती है। ऐसे में सरकार शुल्क बढ़ाकर घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता और मूल्य संतुलन बनाए रखने का प्रयास करती है।

विश्लेषकों के अनुसार इस प्रकार के शुल्क को आमतौर पर विंडफॉल टैक्स की श्रेणी में देखा जाता है, जिसका उद्देश्य असाधारण मुनाफे को नियंत्रित करना और घरेलू उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना होता है। सरकार नियमित अंतराल पर इसकी समीक्षा करती है और वैश्विक बाजार की स्थिति के अनुसार नई दरें तय करती है।

अर्थशास्त्रियों का कहना है कि इस फैसले का सीधा असर मुख्य रूप से उन कंपनियों पर पड़ेगा जो पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात करती हैं। वहीं, घरेलू खुदरा ईंधन कीमतों पर इसका तत्काल प्रभाव पड़ने की संभावना कम मानी जा रही है। आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की चाल और वैश्विक मांग के आधार पर सरकार फिर से शुल्क की समीक्षा कर सकती है।


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