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भारत के फार्मा निर्यात को नई गति देने सीबीएन और फार्मेक्सिल ने नियामकीय सहयोग बढ़ाने को समझौता किया

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Posted On:Tuesday, August 25, 2026

भारत के दवा उद्योग को वैश्विक बाजार में और मजबूत करने के उद्देश्य से केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) और फार्मास्युटिकल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया (फार्मेक्सिल) के बीच महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। दोनों संस्थाओं ने फार्मास्युटिकल उत्पादों के वैध अंतरराष्ट्रीय व्यापार को आसान बनाने और नियामकीय व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।

समझौते पर हस्ताक्षर का कार्यक्रम ग्वालियर स्थित सीबीएन मुख्यालय में आयोजित किया गया। इस पहल का प्रमुख उद्देश्य दवा निर्यात से जुड़ी प्रक्रियाओं में बेहतर समन्वय स्थापित करना और निर्यातकों को नियामकीय आवश्यकताओं को समझने में मदद देना है।

भारत वैश्विक स्तर पर एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (एपीआई), बल्क ड्रग्स, दवा फॉर्मूलेशन और जैविक उत्पादों की आपूर्ति करने वाले प्रमुख देशों में शामिल है। इसके अलावा भारतीय कंपनियां मेडिकल डिवाइस के क्षेत्र में भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रही हैं। ऐसे में निर्यात को प्रोत्साहन देने के साथ-साथ संवेदनशील दवा उत्पादों के दुरुपयोग पर प्रभावी नियंत्रण बनाए रखना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सीबीएन वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अंतर्गत काम करता है और मादक पदार्थों से संबंधित कानूनों के तहत वैध व्यापार की निगरानी, नियमन और प्रवर्तन की जिम्मेदारी निभाता है। वहीं फार्मेक्सिल भारत के फार्मास्युटिकल निर्यातकों को वैश्विक बाजारों तक पहुंच बनाने और निर्यात क्षमता बढ़ाने में सहयोग करता है।

नए समझौते से दोनों संस्थाओं के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान और नियामकीय समन्वय को बेहतर बनाने की उम्मीद है। इससे वैध दवा व्यापार को सुगम बनाने के साथ उन उत्पादों की निगरानी भी मजबूत हो सकती है, जिनके गलत इस्तेमाल की आशंका रहती है। सरकार का मानना है कि निर्यात सुविधा और कड़े नियामकीय नियंत्रण के बीच संतुलन कायम करना भारतीय फार्मा उद्योग की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए आवश्यक है। यह सहयोग भारत के दवा निर्यात को अधिक व्यवस्थित और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में उपयोगी कदम साबित हो सकता है।


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