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टैक्स सीमा से कम आय होने पर भी अनिवार्य है ITR फाइल करना: आयकर अधिनियम के 7 प्रमुख विशेष नियम; जाने किन परिस्थितियों में आवश्यक है रिटर्न

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Posted On:Friday, July 31, 2026

वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करने की प्रक्रिया के बीच अक्सर आम करदाता यह मान लेते हैं कि यदि उनकी कुल वार्षिक आय मूल छूट सीमा (पुरानी व्यवस्था में ₹2.5 लाख और नई कर व्यवस्था में ₹4 लाख) से कम है, तो उन्हें रिटर्न भरने की कोई आवश्यकता नहीं है। हालांकि, भारतीय आयकर अधिनियम के तहत ऐसे कई विशेष प्रावधान (Mandatory Filing Criteria) बनाए गए हैं, जिनके अंतर्गत कर योग्य आय न होने या शून्य कर देनदारी के बावजूद आयकर रिटर्न दाखिल करना कानूनी रूप से अनिवार्य हो जाता है।

आयकर विशेषज्ञों के अनुसार, वित्तीय नियमों के तहत यदि किसी व्यक्ति ने एक वित्त वर्ष के दौरान अपने या किसी अन्य के विदेश भ्रमण पर ₹2 लाख या उससे अधिक खर्च किए हैं, अथवा साल भर में ₹1 लाख से अधिक का बिजली बिल भरा है, तो उसे अनिवार्य रूप से आईटीआर दाखिल करना होगा। इसके अलावा, यदि किसी करदाता के एक या अधिक बचत खातों (Savings Accounts) में कुल ₹50 लाख या उससे अधिक जमा हुए हों, अथवा चालू खातों (Current Accounts) में ₹1 करोड़ या उससे अधिक की नकदी जमा की गई हो, तो भी आईटीआर फाइल करना अनिवार्य है।

अन्य प्रमुख परिस्थितियों में, यदि किसी सामान्य नागरिक का साल भर में कुल TDS या TCS ₹25,000 (वरिष्ठ नागरिकों के लिए ₹50,000) या उससे अधिक कटा हो, तब भी रिटर्न दाखिल करना जरूरी है। साथ ही, यदि किसी निवेशक को शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या प्रॉपर्टी बिक्री में कोई बिजनेस या कैपिटल लॉस हुआ है और वह उसे अगले वर्षों के मुनाफे के साथ सेट-ऑफ (Set-off and Carry Forward) करना चाहता है, तो नियत तारीख से पहले ITR दाखिल करना अनिवार्य होगा।


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