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किसी घर का कैसे गिराया जा सकता है… CJI गवई बोले- बुलडोज़र जस्टिस मेरा सबसे अहम फैसला

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Posted On:Saturday, November 22, 2025

भारत के लोकप्रिय चीफ जस्टिस बीआर गवई सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हो गए हैं, जिसने वकील से देश के शीर्ष जज बनने तक के उनके चार दशक लंबे सफर का अंत कर दिया है। उनके सहयोगियों ने उन्हें भावभीनी विदाई दी, उनकी ईमानदारी, सादगी और डॉ. अंबेडकर से प्रेरित न्यायिक दर्शन की सराहना की, जिसने कई ऐतिहासिक फैसलों को आकार दिया और संस्थागत कामकाज को मजबूत किया।

अपने अंतिम कार्य दिवस पर, सीजेआई गवई ने अपने कार्यकाल के दो सबसे महत्वपूर्ण फैसलों का सार्वजनिक तौर पर उल्लेख किया:

  1. बुलडोजर जस्टिस के खिलाफ दिया गया फैसला, जिसे उन्होंने सबसे अहम बताया।

  2. राज्यों को नौकरी में आरक्षण के लिए अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) को सब-क्लासिफाई करने की इजाजत देने वाला फैसला, जिसे उन्होंने दूसरे नंबर पर रखा।

परंपरा से हटकर फैसलों का उल्लेख

सीजेआई गवई ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के फेयरवेल कार्यक्रम में इन फैसलों का उल्लेख किया। यह परंपरा से हटकर था, क्योंकि यह पहला मौका था जब किसी चीफ जस्टिस ने फेयरवेल फंक्शन में अपने द्वारा लिखे गए फैसलों का सार्वजनिक रूप से जिक्र किया हो।

उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि अगर उनसे उनके द्वारा लिखा गया सबसे जरूरी फैसला चुनने के लिए कहा जाए, तो वह निश्चित रूप से बुलडोजर जस्टिस के खिलाफ वाला फैसला होगा।

बुलडोजर जस्टिस क्यों है 'गैरकानूनी'?

सीजेआई गवई ने बुलडोजर जस्टिस की अवधारणा को कानून के शासन के विपरीत बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केवल किसी जुर्म के आरोप या दोष के आधार पर किसी व्यक्ति का घर गिराना कानून के खिलाफ है।

उन्होंने तर्क दिया:

"सिर्फ इसलिए किसी व्यक्ति का घर कैसे गिराया जा सकता है, कि उस पर किसी जुर्म का आरोप है या वह उसके लिए दोषी है? उसके परिवार और माता-पिता की क्या गलती है? रहने की जगह का अधिकार एक मौलिक अधिकार है।"

सीजेआई गवई ने कहा कि वह अपने इस फैसले से संतुष्ट हैं क्योंकि उन्होंने न्याय के इस तेजी से बढ़ते और विवादास्पद स्वरूप के खिलाफ निर्णय दिया।

मॉरीशस में भी की थी टिप्पणी

यह पहली बार नहीं था जब चीफ जस्टिस गवई ने 'बुलडोजर एक्शन' पर टिप्पणी की हो। इससे पहले, मॉरीशस में भी एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने अपने ही 2024 के 'बुलडोजर केस' फैसले का जिक्र किया था।

उन्होंने उस फैसले के बारे में बात करते हुए कहा था, "इस फैसले में एक स्पष्ट संदेश दिया गया है कि भारतीय न्याय व्यवस्था कानून के शासन से चलती है, बुलडोजर के शासन से नहीं।"

सीजेआई गवई की न्यायिक विरासत को उनकी अटूट प्रतिबद्धता के लिए याद किया जाएगा कि न्याय प्रक्रिया हमेशा संवैधानिक सिद्धांतों और कानून के उचित शासन पर आधारित होनी चाहिए, न कि तात्कालिक या लोकप्रिय भावनाओं पर।


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