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कौन हैं वो 5 आतंकी जो 36 साल पहले रूबिया सईद अपहरण केस में छोड़े गए, अब कहां हैं?

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Posted On:Tuesday, December 2, 2025

भारत के इतिहास में 1989 का वह दौर एक काला अध्याय है, जब तत्कालीन गृह मंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रूबिया सईद का अपहरण कर लिया गया था। यह अपहरण उनके घर से महज 500 मीटर की दूरी पर एक सुनियोजित साजिश के तहत किया गया। इस किडनैपिंग के पीछे का उद्देश्य जेल में बंद 5 दुर्दांत आतंकियों की रिहाई कराना था। आतंकवादियों ने शर्त रखी कि वे तभी रूबिया को रिहा करेंगे, जब उनके साथियों को रिहा कर दिया जाएगा।

आतंकियों ने अपनी इस साजिश में सफलता हासिल की और भारत सरकार को उनकी मांग माननी पड़ी। इस घटना के कारण कश्मीर घाटी में आतंकवाद को एक बड़ा बढ़ावा मिला।

कौन थे वे 5 आतंकी?

रूबिया सईद के बदले जिन पांच आतंकियों को रिहा किया गया था, वे सभी जम्मू और कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (JKLF) नामक संगठन से जुड़े हुए थे। उनके नाम थे:

  1. हामिद शेख

  2. अल्ताफ अहमद भट

  3. नूर मोहम्मद कलवाल

  4. जावेद अहमद जरगर

  5. शेर खान

आज कहाँ हैं ये आतंकी?

  • हामिद शेख: रिहाई के कुछ समय बाद, 1992 में एक मुठभेड़ के दौरान उसकी मौत हो गई।

  • शेर खान: रिहाई के कुछ ही समय बाद, 1992 में सुरक्षाबलों ने उसे मार गिराया था।

  • नूर मोहम्मद कलवाल: वह अभी भी जीवित है और JKLF के लिए काम करता है। पुलिस के हालिया स्टेटमेंट के मुताबिक, वह अभी बीमार है और संगठन के ज़ोनल प्रेसिडेंट के तौर पर सक्रिय है। फिलहाल उसकी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

  • अल्ताफ अहमद भट: वह भी जीवित है और जम्मू कश्मीर साल्वेशन मूवमेंट के चेयरमैन के तौर पर काम कर रहा है। वह वर्तमान में पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में रहता है।

  • जावेद अहमद जरगर: इनपुट में इसकी वर्तमान स्थिति का स्पष्ट उल्लेख नहीं है।

मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला का विरोध

जिस समय रूबिया का अपहरण हुआ था, तत्कालीन मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला लंदन में थे। अपहरण की खबर उन तक पहुंची, तो उन्होंने रूबिया सईद के बदले आतंकवादियों को छोड़ने के विचार का खुलकर और कड़ा विरोध किया था।

अब्दुल्ला आज तक मानते हैं कि रूबिया सईद के अपहरण और 1999 में IC-814 फ्लाइट हाईजैक जैसी घटनाओं में आतंकवादियों को छोड़ने की भारत सरकार की नीति के कारण ही घाटी में आतंकवादी घटनाओं की संख्या में भारी बढ़त देखने को मिली।

रिहाई का घटनाक्रम

किडनैपिंग के पाँच दिन बाद, 13 दिसंबर को केंद्र सरकार ने जेल में बंद पाँच आतंकवादियों को रिहा करने का फैसला किया।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, रिहाई के दिन दो एम्बेसडर कारें श्रीनगर के डाउनटाउन में रुकीं, जिनमें से पाँच आदमी उतरे। वे एक ऑटो-रिक्शा में बैठे और भीड़ में गायब हो गए। घाटी के पत्रकार ज़फ़र मेराज को फोन पर यह सूचना मिली थी कि, "हमें हमारे लड़के मिल गए हैं। लड़की जल्द ही अपने माता-पिता के पास होगी।" इसके बाद रूबिया सईद को रिहा कर दिया गया।

यह घटना भारत सरकार के लिए एक कठिन समझौता थी जिसने आतंकवादियों को न केवल बड़ी जीत दिलाई, बल्कि भविष्य में और अधिक हाई-प्रोफाइल किडनैपिंग और हाईजैक को प्रोत्साहित किया।


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