ताजा खबर
Jr NTR का ‘NTRNeel’ से फर्स्ट लुक आउट   ||    ‘पति पत्नी और वो 2’ के सेट पर आयुष्मान, सारा, वामिका और रकुल सांग शूट करते नजर आये   ||    ‘जेलर 2’ की शूटिंग पूरी, रजनीकांत के मुथुवेल पांडियन की वापसी पर फैंस का जश्न शुरू   ||    ‘आवारापन 2’ का इमोशनल रिटर्न—इमरान हाशमी ने पोस्टर्स के साथ रिलीज़ डेट की कन्फर्मेशन से बढ़ाया एक्सा...   ||    बिना गोली चलाए चीन की मास्टरस्ट्रोक जीत ईरान-अमेरिका युद्ध से जिनपिंग को मिले 4 बड़े फायदे   ||    भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर वाशिंगटन में मंथन, जल्द मिल सकती है खुशखबरी   ||    यूपी में खिलेगा कमल, सपा का 'टोपी' वाला ढोंग खत्म: बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन का अखिलेश यादव पर तीखा ...   ||    महिला आरक्षण पर बीजेपी का शक्ति प्रदर्शन, CM योगी बोले कांग्रेस और सपा का चेहरा अलोकतांत्रिक   ||    तेल की जंग में तेहरान की ललकार! प्रतिबंधों पर दी बड़ी धमकी; ‘ईरानी तेल रुका तो दुनिया को भुगतने होंग...   ||    IPL 2026: स्टार गेंदबाजों से सजी मुंबई इंडियंस की 'पेस बैटरी' हुई फेल, आंकड़ों में सबसे फिसड्डी   ||   

महिलाएं मेहर और दहेज वापस लेने की हकदार, तलाक से जुड़े केस पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

Photo Source :

Posted On:Wednesday, December 3, 2025

सुप्रीम कोर्ट ने कल मंगलवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि तलाकशुदा मुस्लिम महिलाएं शादी के समय माता-पिता द्वारा उसे या उसके पति को दिए गए मेहर, कैश, सोना और दूसरी चीजें कानूनी तौर पर वापस पाने की हकदार हैं। कोर्ट का यह फैसला तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा और सम्मान को मजबूत करने के मकसद से दिया गया है। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह की चीजों को महिला की संपत्ति मानी जानी चाहिए और शादी टूटने के बाद उसे वापस कर दिया जाना चाहिए।

जस्टिस संजय करोल और एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा कि मुस्लिम वुमेन (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन डायवोर्स) एक्ट, 1986 (Muslim Women (Protection of Rights on Divorce) Act, 1986) के नियमों का मतलब इस तरह निकाला जाना चाहिए कि यह बराबरी और स्वायत्ता (Autonomy) के संवैधानिक वादे को पूरा करे, न कि इसे सिर्फ सिविल-डिस्प्यूट के नजरिए से देखा जाए।

समाज में पितृसत्तात्मक भाव पर SC की टिप्पणी

बेंच ने अपने फैसले में कहा कि तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए साल 1986 में बनाए गए कानून में समानता, गरिमा और स्वायत्तता की भावना को सर्वोपरि रखा जाना चाहिए। कोर्ट ने इस बात पर भी ध्यान देने को कहा कि छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में पितृसत्तात्मक भेदभाव अब भी देखी जाती है।

बेंच ने 1986 के एक्ट की धारा 3 का जिक्र किया, जो एक तलाकशुदा मुस्लिम महिला को उन सभी संपत्ति का हक देता है जो उसे शादी से पहले, शादी के समय या शादी के बाद उसके रिश्तेदारों, पति, या पति के किसी रिश्तेदार ने दी हैं।

बेंच ने कहा, "देश का संविधान सभी के लिए एक उम्मीद, यानी बराबरी तय करता है, लेकिन अभी यह होना बाकी है। कोर्ट को इस मकसद के लिए अपना काम करते हुए, अपनी सोच को सामाजिक न्याय के फैसले पर आधारित करना चाहिए।"

कलकत्ता हाई कोर्ट का फैसला रद्द, 6 हफ्ते में लौटाने का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें एक महिला के पूर्व पति के पक्ष में फैसला सुनाया गया था और उसे (पति को) उस सामान का कुछ हिस्सा वापस करने से राहत दी गई थी।

मामला: याचिकाकर्ता और प्रतिवादी की शादी 28 अगस्त 2005 को हुई थी। तलाक के बाद, महिला ने मुस्लिम वुमेन एक्ट, 1986 की धारा 3 के तहत कोर्ट का रुख किया और 17.67 लाख रुपये से अधिक की राशि और सामान वापस किए जाने का अनुरोध किया था।

SC का आदेश:

  • पूर्व पति (प्रतिवादी) को यह निर्देश दिया जाता है कि वह अगले 6 हफ्ते के अंदर कोर्ट की रजिस्ट्री में आदेश के अनुपालन का हलफनामा दाखिल करे।

  • राशि सीधे अपीलकर्ता (पूर्व पत्नी) के बैंक खाते में भेजी जाएगी।

  • यदि यह सब कुछ समय के अंदर नहीं हुआ तो प्रतिवादी को 9 फीसदी सालाना ब्याज के दर से रकम चुकानी होगी।

यह फैसला तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं के लिए एक बड़ी राहत है, जो उन्हें शादी के दौरान मिले सामान पर उनका कानूनी हक सुनिश्चित करता है।


मुज़फ़्फ़रपुर और देश, दुनियाँ की ताजा ख़बरे हमारे Facebook पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें,
और Telegram चैनल पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें



मेरा गाँव मेरा देश

अगर आप एक जागृत नागरिक है और अपने आसपास की घटनाओं या अपने क्षेत्र की समस्याओं को हमारे साथ साझा कर अपने गाँव, शहर और देश को और बेहतर बनाना चाहते हैं तो जुड़िए हमसे अपनी रिपोर्ट के जरिए. muzaffarpurvocalsteam@gmail.com

Follow us on

Copyright © 2021  |  All Rights Reserved.

Powered By Newsify Network Pvt. Ltd.