ताजा खबर
Jr NTR का ‘NTRNeel’ से फर्स्ट लुक आउट   ||    ‘पति पत्नी और वो 2’ के सेट पर आयुष्मान, सारा, वामिका और रकुल सांग शूट करते नजर आये   ||    ‘जेलर 2’ की शूटिंग पूरी, रजनीकांत के मुथुवेल पांडियन की वापसी पर फैंस का जश्न शुरू   ||    ‘आवारापन 2’ का इमोशनल रिटर्न—इमरान हाशमी ने पोस्टर्स के साथ रिलीज़ डेट की कन्फर्मेशन से बढ़ाया एक्सा...   ||    बिना गोली चलाए चीन की मास्टरस्ट्रोक जीत ईरान-अमेरिका युद्ध से जिनपिंग को मिले 4 बड़े फायदे   ||    भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर वाशिंगटन में मंथन, जल्द मिल सकती है खुशखबरी   ||    यूपी में खिलेगा कमल, सपा का 'टोपी' वाला ढोंग खत्म: बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन का अखिलेश यादव पर तीखा ...   ||    महिला आरक्षण पर बीजेपी का शक्ति प्रदर्शन, CM योगी बोले कांग्रेस और सपा का चेहरा अलोकतांत्रिक   ||    तेल की जंग में तेहरान की ललकार! प्रतिबंधों पर दी बड़ी धमकी; ‘ईरानी तेल रुका तो दुनिया को भुगतने होंग...   ||    IPL 2026: स्टार गेंदबाजों से सजी मुंबई इंडियंस की 'पेस बैटरी' हुई फेल, आंकड़ों में सबसे फिसड्डी   ||   

राज्यपालों की भूमिका पर सुनवाई: केंद्र ने कहा बातचीत से हल निकले, सुप्रीम कोर्ट बोला- राज्यपाल मनमानी नहीं कर सकते, जानिए पूरा मामला

Photo Source :

Posted On:Thursday, August 21, 2025

मुंबई, 21 अगस्त, (न्यूज़ हेल्पलाइन)। केंद्र सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि यदि राज्यपाल किसी विधेयक पर लंबे समय तक फैसला नहीं लेते, तो राज्यों को अदालत का दरवाजा खटखटाने की बजाय बातचीत के जरिए समाधान तलाशना चाहिए। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हर समस्या का हल अदालतों से नहीं निकल सकता। लोकतंत्र में संवाद को हमेशा प्राथमिकता दी जानी चाहिए और भारत में दशकों से यही परंपरा रही है। मेहता ने उदाहरण देते हुए कहा कि कई मौकों पर मुख्यमंत्री राज्यपाल से सीधे मिलते हैं, प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति से संवाद करते हैं और समाधान निकाल लेते हैं। कई बार केवल फोन पर हुई बातचीत से भी रास्ता निकल आया है। उनका कहना था कि संविधान में राज्यपाल या राष्ट्रपति के लिए विधेयकों पर निर्णय लेने की कोई समय-सीमा निर्धारित नहीं की गई है। जहां भी समय-सीमा तय है, उसका स्पष्ट उल्लेख किया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत चाहे तो संसद से ऐसा कानून बनाने का सुझाव दे सकती है, जिसमें राज्यपाल के लिए समय-सीमा तय हो, लेकिन अदालत स्वयं ऐसा आदेश नहीं दे सकती।

वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को स्पष्ट किया कि चुनी हुई सरकारें राज्यपाल की इच्छा पर निर्भर नहीं हो सकतीं। अदालत ने कहा कि यदि कोई बिल विधानसभा से पास होकर राज्यपाल के पास जाता है और वे उसे पुनर्विचार के लिए लौटाते हैं, तो विधानसभा दोबारा उसे पास कर भेज सकती है। ऐसी स्थिति में राज्यपाल के पास मंजूरी देने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता। अदालत ने यह भी कहा कि राज्यपाल अनिश्चितकाल तक बिल को रोके नहीं रख सकते, क्योंकि इससे निर्वाचित सरकारें राज्यपाल की मर्जी पर चलने को मजबूर हो जाएंगी।

यह पूरा मामला राष्ट्रपति और राज्यपाल की ओर से बिलों पर मंजूरी, रोक या राष्ट्रपति के पास भेजे जाने की प्रक्रिया को लेकर है। सीजेआई बीआर गवई की अध्यक्षता में पांच जजों की बेंच इस मामले की लगातार तीसरे दिन सुनवाई कर रही है। बेंच में जस्टिस सूर्यकांत, विक्रम नाथ, पी एस नरसिम्हा और ए एस चंदुरकर शामिल हैं।


मुज़फ़्फ़रपुर और देश, दुनियाँ की ताजा ख़बरे हमारे Facebook पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें,
और Telegram चैनल पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें



मेरा गाँव मेरा देश

अगर आप एक जागृत नागरिक है और अपने आसपास की घटनाओं या अपने क्षेत्र की समस्याओं को हमारे साथ साझा कर अपने गाँव, शहर और देश को और बेहतर बनाना चाहते हैं तो जुड़िए हमसे अपनी रिपोर्ट के जरिए. muzaffarpurvocalsteam@gmail.com

Follow us on

Copyright © 2021  |  All Rights Reserved.

Powered By Newsify Network Pvt. Ltd.