ताजा खबर
Jr NTR का ‘NTRNeel’ से फर्स्ट लुक आउट   ||    ‘पति पत्नी और वो 2’ के सेट पर आयुष्मान, सारा, वामिका और रकुल सांग शूट करते नजर आये   ||    ‘जेलर 2’ की शूटिंग पूरी, रजनीकांत के मुथुवेल पांडियन की वापसी पर फैंस का जश्न शुरू   ||    ‘आवारापन 2’ का इमोशनल रिटर्न—इमरान हाशमी ने पोस्टर्स के साथ रिलीज़ डेट की कन्फर्मेशन से बढ़ाया एक्सा...   ||    बिना गोली चलाए चीन की मास्टरस्ट्रोक जीत ईरान-अमेरिका युद्ध से जिनपिंग को मिले 4 बड़े फायदे   ||    भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर वाशिंगटन में मंथन, जल्द मिल सकती है खुशखबरी   ||    यूपी में खिलेगा कमल, सपा का 'टोपी' वाला ढोंग खत्म: बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन का अखिलेश यादव पर तीखा ...   ||    महिला आरक्षण पर बीजेपी का शक्ति प्रदर्शन, CM योगी बोले कांग्रेस और सपा का चेहरा अलोकतांत्रिक   ||    तेल की जंग में तेहरान की ललकार! प्रतिबंधों पर दी बड़ी धमकी; ‘ईरानी तेल रुका तो दुनिया को भुगतने होंग...   ||    IPL 2026: स्टार गेंदबाजों से सजी मुंबई इंडियंस की 'पेस बैटरी' हुई फेल, आंकड़ों में सबसे फिसड्डी   ||   

कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय महाराज जी ने जयपुर को बताया बड़ा वृंदावन, जानिए पूरा मामला

Photo Source :

Posted On:Monday, August 18, 2025

मुंबई, 18 अगस्त, (न्यूज़ हेल्पलाइन)। वृंदावन के प्रसिद्ध कथावाचक इंद्रेश उपाध्याय महाराज जी इन दिनों सीकर जिले के रेवासा धाम में कथा सुना रहे हैं। जन्माष्टमी के अवसर पर वे शनिवार को जयपुर के आराध्य श्री गोविंद देवजी मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने ठाकुर जी का अभिषेक दर्शन किया। इस मौके पर श्री मलूक पीठाधीश्वर राजेंद्र दास महाराज जी और वृंदावन के कथावाचक पुंडरीक गोस्वामी महाराज जी भी उनके साथ मौजूद रहे। दर्शन के बाद वे पुनः रेवासा लौटकर कथा में सम्मिलित हुए। कथा के दौरान उन्होंने गोविंद देवजी के प्राकट्य का वर्णन करते हुए बताया कि जब ठाकुर जी का स्वरूप प्रकट हुआ तो माताओं ने घूंघट कर लिया। इस पर वज्रनाभ ने अपनी दादी से कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि उनका मुखमंडल, नाक और होंठ स्वयं श्रीकृष्ण जैसे हैं। उपाध्याय ने कहा कि जयपुर में विराजमान श्री गोविंद देवजी, गोपीनाथ जी और करौली के मदन मोहन जी वास्तव में एक ही हैं।

उन्होंने बताया कि पहले मदन मोहन जी भी जयपुर में विराजते थे, बाद में करौली चले गए। गौड़ीय वैष्णव परंपरा के अन्य देवालय जैसे श्री दामोदर जी और श्री विनोदी लाल जी भी जयपुर में ही स्थापित हैं। उन्होंने कहा कि जयपुर को छोटी काशी कहा जाता है, लेकिन वास्तव में यह बड़ा वृंदावन है। जन्माष्टमी पर गोविंद देव जी के दर्शन को उन्होंने अपने लिए सौभाग्य बताया। महाराज जी ने यह भी कहा कि जब वे जगन्नाथ पुरी या द्वारका पुरी जाते हैं तो मन में भाव आता है कि भक्त दूर-दूर से दर्शन के लिए आते हैं, जिन्हें कठिनाई न होती हो। लेकिन जयपुर में गोविंद देवजी को देखकर संतोष मिलता है कि यहां के लोग ठाकुर जी से अटूट प्रेम करते हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण के प्रपौत्र वज्रनाभ ने अपनी दादी से भगवान के स्वरूप के बारे में जानना चाहा था। जिस काले पत्थर पर श्रीकृष्ण स्नान करते थे, उसी से तीन विग्रह बने। उनमें मुखारविंद की छवि जयपुर के गोविंद देव जी मंदिर में, वक्षस्थल की छवि गोपीनाथ जी मंदिर में और चरणारविंद की छवि करौली के मदन मोहन जी मंदिर में विराजमान है। मान्यता है कि इन तीनों स्वरूपों का एक ही दिन दर्शन करने से भगवान श्रीकृष्ण के संपूर्ण स्वरूप का दर्शन होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी विश्वास के कारण जन्माष्टमी पर लाखों श्रद्धालु जयपुर और करौली पहुंचकर तीनों मंदिरों के दर्शन का पुण्य लाभ उठाते हैं।


मुज़फ़्फ़रपुर और देश, दुनियाँ की ताजा ख़बरे हमारे Facebook पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें,
और Telegram चैनल पर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें



मेरा गाँव मेरा देश

अगर आप एक जागृत नागरिक है और अपने आसपास की घटनाओं या अपने क्षेत्र की समस्याओं को हमारे साथ साझा कर अपने गाँव, शहर और देश को और बेहतर बनाना चाहते हैं तो जुड़िए हमसे अपनी रिपोर्ट के जरिए. muzaffarpurvocalsteam@gmail.com

Follow us on

Copyright © 2021  |  All Rights Reserved.

Powered By Newsify Network Pvt. Ltd.