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DoT का बड़ा आदेश: WhatsApp, Telegram को SIM-बाइंडिंग अनिवार्य; साइबर धोखाधड़ी रोकने का दावा, प्राइवेसी पर उठे सवाल

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Posted On:Tuesday, December 2, 2025

मुंबई, 2 दिसंबर, (न्यूज़ हेल्पलाइन) देश में बढ़ते डिजिटल धोखाधड़ी और साइबर अपराधों को रोकने के लिए दूरसंचार विभाग (DoT) ने एक महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है। इस निर्देश के तहत, WhatsApp, Telegram, Signal जैसे ओवर-द-टॉप (OTT) मैसेजिंग प्लेटफॉर्मों के लिए उपयोगकर्ता खातों को उनके SIM कार्ड से अनिवार्य रूप से जोड़ना (SIM-binding) होगा।

यह नया नियम साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करने और प्लेटफॉर्मों पर जवाबदेही (accountability) बढ़ाने के उद्देश्य से लाया गया है, हालांकि, इसने उपयोगकर्ताओं की प्राइवेसी और प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल को लेकर नई चिंताएं भी खड़ी कर दी हैं।

DoT का निर्देश क्या कहता है?

DoT ने पाया है कि वर्तमान में मैसेजिंग ऐप्स उपयोगकर्ताओं को डिवाइस में भौतिक SIM कार्ड न होने पर भी अपनी सेवाओं (जैसे WhatsApp Web) का उपयोग करने की अनुमति देते हैं। DoT का कहना है कि इसका दुरुपयोग देश के बाहर से साइबर धोखाधड़ी करने के लिए किया जा रहा है, जिससे उनकी पहचान करना मुश्किल हो जाता है।

नए निर्देश के मुख्य बिंदु:
  • SIM-बाइंडिंग की अनिवार्यता: प्लेटफॉर्मों को अगले 90 दिनों के भीतर यह सुनिश्चित करना होगा कि उपयोगकर्ता का SIM कार्ड उसके अकाउंट से लगातार जुड़ा रहे।
  • वेब लॉगआउट: कंपेनियन या वेब इंस्टैंस (जैसे WhatsApp Web) पर उपयोगकर्ताओं को हर 6 घंटे में अनिवार्य रूप से लॉग आउट करना होगा।
  • पुनः लिंक का विकल्प: प्लेटफॉर्मों को QR-कोड आधारित तरीके से खातों को फिर से लिंक करने का विकल्प प्रदान करना होगा।


यह आदेश हाल ही में अधिसूचित Telecommunication Cybersecurity Amendment Rules, 2025 के तहत जारी किया गया है।

टेलीकॉम कंपनियों का समर्थन

इस कदम का भारतीय टेलीकॉम उद्योग ने स्वागत किया है। सेलुलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (COAI), जिसमें भारती एयरटेल, रिलायंस जियो और वोडाफोन आइडिया जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल हैं, ने इसे "ऐतिहासिक कदम" बताया है।

COAI के अनुसार, यह निरंतर लिंकेज यह सुनिश्चित करेगा कि SIM कार्ड और उससे जुड़े कम्युनिकेशन ऐप द्वारा की गई किसी भी गतिविधि के लिए पूरी तरह से पता लगाने की क्षमता (traceability) मौजूद हो, जिससे गुमनामी और दुरुपयोग को रोका जा सकेगा।

प्राइवेसी और उपयोग पर चिंताएं

जहां एक ओर टेलीकॉम कंपनियां इस कदम का समर्थन कर रही हैं, वहीं डिजिटल अधिकार वकीलों और विशेषज्ञों ने इस पर कई गंभीर चिंताएं व्यक्त की हैं:
  • प्राइवेसी का हनन: डिजिटल अधिकार अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि SIM-बाइंडिंग से उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता (privacy) का हनन हो सकता है।
  • उपयोग में बाधाएं: यह नियम उन लोगों के लिए मुश्किलें पैदा कर सकता है जो विदेश यात्रा करते हैं, डुअल-SIM डिवाइस का उपयोग करते हैं, या पेशेवर कारणों से कई डिवाइस पर मैसेजिंग प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हैं।
  • अस्पष्ट प्रश्न: विशेषज्ञों ने यह भी पूछा है कि यदि कोई उपयोगकर्ता SIM कार्ड अपग्रेड करता है (जैसे 4G से 5G), डिवाइस बदलता है, या क्षतिग्रस्त SIM को बदलता है, तो ऐसे मामलों को कैसे संभाला जाएगा।
  • प्रभावीपन पर सवाल: कुछ विशेषज्ञों का मानना ​​है कि स्कैमर (scammers) फर्जी KYC के जरिए SIM कार्ड प्राप्त करके इस नियम को दरकिनार कर सकते हैं, जिससे यह डिजिटल धोखाधड़ी को रोकने में उतना प्रभावी साबित नहीं हो सकता है जितना दावा किया जा रहा है।


फिलहाल, यह देखना बाकी है कि WhatsApp, Telegram और अन्य OTT प्लेटफॉर्म इस नए आदेश का पालन कैसे करते हैं, और क्या वे इन आवश्यकताओं के विरुद्ध कोई कानूनी चुनौती पेश करते हैं।


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