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क्या बैठे-बैठे एड़ी उठाने से कंट्रोल हो सकता है ब्लड शुगर? जानिए 'सोलियस पुश-अप्स' का वैज्ञानिक सच

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Posted On:Monday, September 7, 2026

सोशल मीडिया पर इन दिनों ब्लड शुगर कंट्रोल करने के लिए 'सोलियस पुश-अप्स' (Soleus Push-ups) यानी कुर्सी पर बैठे-बैठे एड़ी उठाने (seated calf raises) का ट्रेंड काफी चर्चा में है। दावा किया जा रहा है कि बिना किसी भारी कसरत के, केवल पैरों की पिंडलियों (Calves) की मांसपेशियों को सक्रिय कर ग्लूकोज का स्तर कम किया जा सकता है। विशेषज्ञों ने बताया है कि इस दावे में कितना सच है और विज्ञान इस बारे में क्या कहता है।
क्या है दावा?
लॉन्गेविटी और डिसीज रिवर्सल एक्सपर्ट डॉ. विशाखा शिवदासानी के अनुसार, पिंडली के निचले हिस्से में मौजूद 'सोलियस मांसपेशी' (Soleus Muscle) की कार्यप्रणाली अन्य मांसपेशियों से थोड़ी अलग है। उनका कहना है कि यह मांसपेशी इंसुलिन पर पूरी तरह निर्भर हुए बिना भी खून से सीधे ग्लूकोज सोखने की क्षमता रखती है। ऐसे में इंसुलिन रेजिस्टेंस या प्रीडायबिटीज से जूझ रहे लोग अगर बैठे-बैठे भी सोलियस पुश-अप्स करते हैं, तो इससे ब्लड शुगर और इंसुलिन का स्तर नीचे आ सकता है।
क्या कहता है विज्ञान?
एशियन हॉस्पिटल के एंडोक्राइनोलॉजी सीनियर कंसल्टेंट डॉ. संदीप खर्ब के मुताबिक, वैज्ञानिक शोध इस बात की पुष्टि करते हैं कि सोलियस मांसपेशी ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म में अहम भूमिका निभाती है:

  • ग्लूकोज का सीधा इस्तेमाल: iScience जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, हल्की गतिविधि के दौरान जहां बाकी मांसपेशियां ब्लड ग्लूकोज और फैट का अधिक इस्तेमाल नहीं कर पातीं, वहीं सोलियस मांसपेशी बार-बार सिकुड़ने और फैलने (contractions) पर सीधे ग्लूकोज को ऊर्जा के रूप में उपयोग कर सकती है।
  • इंसुलिन रेजिस्टेंस में मददगार: यह प्रक्रिया मेटाबॉलिक समस्याओं से जूझ रहे लोगों में भी ग्लूकोज नियंत्रण में मदद कर सकती है।
क्या यह पूरी तरह से इलाज या कसरत का विकल्प है?
डॉक्टरों ने साफ किया है कि इसे किसी जादुई समाधान या पारंपरिक इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए:
  • यह कसरत या दवा का विकल्प नहीं: डॉ. खर्ब के अनुसार, सोलियस पुश-अप्स कभी भी नियमित फिजिकल एक्सरसाइज, संतुलित आहार या डॉक्टरी इलाज की जगह नहीं ले सकते।
  • एक सहायक उपाय (Additional Tool): यह तरीका केवल लंबे समय तक एक ही जगह बैठे रहने के दुष्प्रभावों को कम करने का एक जरिया है।
  • किनके लिए ज्यादा फायदेमंद: डेस्क जॉब करने वाले लोग, बुजुर्ग, या वे लोग जो किसी बीमारी व सीमित गतिशीलता (mobility issues) के कारण भारी व्यायाम नहीं कर सकते, उनके लिए यह विशेष रूप से उपयोगी हो सकता है।
डेस्क जॉब करने वाले क्या करें?
विशेषज्ञों की सलाह है कि ब्लड शुगर और मेटाबॉलिज्म दुरुस्त रखने के लिए सिर्फ एक एक्सरसाइज पर निर्भर न रहें:
  • हर 30 से 60 मिनट में सीट से उठकर थोड़ा टहलें।
  • खाने के बाद हल्की वॉक करें।
  • लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करें।
  • हफ्ते में स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और एरोबिक एक्सरसाइज दोनों को शामिल करें।
निष्कर्ष: बैठे-बैठे सोलियस पुश-अप्स करना लंबे समय तक बैठे रहने के नुकसान को कम करने का एक अच्छा तरीका जरूर है, लेकिन बेहतर मेटाबॉलिक हेल्थ के लिए संतुलित खानपान, पर्याप्त नींद, तनाव प्रबंधन और नियमित वर्कआउट ही सबसे असरदार रास्ता है।


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